अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए बने ट्रस्ट को लेकर विवाद क्यों खड़ा हो गया है?

1 week ago 10
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का कामकाज श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट देख रहा है. इस ट्रस्ट के खिलाफ गृह मंत्री अमित शाह के मंत्रालय, यानी गृह मंत्रालय को एक लीगल नोटिस भेजा गया है. ये नोटिस अयोध्या के निर्वाणी अखाड़े के प्रमुख महंत धर्म दास ने भेजा है. इसमें ट्रस्ट को गैरकानूनी बताकर फिर से गठन की मांग की गई है. ऐसा न करने पर कानूनी कार्यवाही की चेतावनी दी गई है. 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, ये नोटिस 12 नवंबर को भेजा गया. महंत धर्म दास ने आरोप लगाए कि मौजूदा ट्रस्ट गैर-कानूनी, मनमाना है. सुप्रीम कोर्ट के पिछले साल नवंबर में दिए आदेश के भी खिलाफ है. उन्होंने आरोपों में ये भी कहा कि ट्रस्ट के गठन में कई बिंदुओं पर कानूनी, वैधानिक और प्रथागत प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ है. उन्होंने मांग की है कि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का निर्माण और रेगुलेशन 'सुप्रीम कोर्ट के फैसले' के अनुसार किया जाए.

और क्या आरोप लगाए?

निर्वाणी अखाड़ा के प्रमुख का ये भी आरोप है कि रामलला जितने समय रिसीवर की कस्टडी में रहे, उस दौरान जो चढ़ावा और दान मिला, वह राशि रामलला को हैंडओवर नहीं की गई. ट्रस्ट की स्थापना के समय ट्रस्ट की प्रॉपर्टी को शामिल करने के संबंध में भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया गया. महंत ने नोटिस में कहा है कि दो महीने के भीतर अगर केंद्र सरकार कोई एक्शन लेने में नाकाम रही तो कानून का सहारा लिया जाएगा.

पॉलिटिकल एजेंडा रखने का आरोप

महंत धर्म दास ने ये भी आरोप लगाया कि जो लोग 1949 से इसका केस लड़ रहे थे, उन्हें ट्रस्ट के गठन में उचित स्थान नहीं दिया गया. जबकि जो लोग 1989 के बाद से इस केस में शामिल हुए, उन्हें अहमियत दी गई. धर्म दास ने आरोप लगते हुए कहा, "ये यही दिखाता है कि वो लोग जिनकी सरकार तक राजनीतिक पहुंच है, उन्हें ही ट्रस्ट में अहम रोल दिए गए हैं."

इस नोटिस में गृह मंत्रालय पर 'हिंदुओं को बांटने' का आरोप भी लगाया गया है. दरअसल, एक अनुसूचित जाति के व्यक्ति को ट्रस्ट का ऑल-टाइम ट्रस्टी बनाया गया है. इसको लेकर महंत धर्म दास का आरोप है कि ये कदम पॉलिटिकल एजेंडा हासिल करने के मकसद से उठाया गया. उन्होंने पूछा कि वैष्णव संप्रदाय के अखाड़ों में से किसी को ट्रस्ट में जगह क्यों नहीं दी गई?


वीडियो देखें: पड़ताल: क्या राजीव गांधी नवंबर, 1989 में ही राम मंदिर भूमि का पूजन कर चुके हैं?

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