बुखार के बारे में भ्रांतियाँ और समाधान

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 *बुखार के बारे में भ्रांतियाँ और समाधान*


बुखार के बारे में मैं पहले भी कई बार लिख चुका हूँ, लेकिन इसके बारे में समाज में इतनी भ्रांतियाँ फैली हुई हैं कि बार-बार लिखना भी कम लगता है। इस बार चीनी वायरस कोरोना के कारण तो हद ही हो गयी है। जरा सा बुखार आते ही लोग घबरा जाते हैं और किसी भी तरह उसे उतारने के लिए हाथ धोकर और लट्ठ लेकर उसके पीछे पड़ जाते हैं। यह प्रवृत्ति बहुत ही हानिकारक है। आपको यह जान लेना चाहिए कि 104 अंश तक का बुखार भी किसी भी तरह रोगी के जीवन के लिए घातक नहीं है। 


समाज में डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया तथा अन्य प्रकार के वायरल बुखार बहुत फैलते रहे हैं। मामूली सर्दी जुकाम हो जाने या लू लग जाने पर भी पीड़ित को बुखार आ जाता है। वर्तमान समय में कोरोना से भी बुखार आ रहा है। मैंने इन सभी तरह के बुखारों से पीड़ित कई व्यक्तियों का किसी भी दवा के बिना केवल जल और फलों से सफल उपचार किया है। 


सबसे पहले तो यह समझ लीजिए कि बुखार अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर में विकार एकत्र हो जाने का ही संकेत है। प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार बुखार हमारे लिए हितकर है, क्योंकि वह शरीर के विकारों को नष्ट करने में हमारी सहायता करता है। इसलिए जबर्दस्ती बुखार को दबा देना बहुत हानिकारक है। इसके बजाय हमें उन कारणों को दूर करना चाहिए जिनके कारण बुखार आया है। बुखार इस बात का भी संकेत है कि अभी हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति बची हुई है और अपना कार्य कर रही है। ऐसे हितकारी बुखार को तेज दवाओं द्वारा दबा देना अपने स्वास्थ्य से खिलवाड़ करना है। 


बुखार चाहे किसी भी कारण से आया हो, निम्नलिखित उपचार से उसे नियंत्रित करके रोगी को स्वस्थ किया जा सकता है-


1. बुखार होते ही सबसे पहले उसे थर्मामीटर लगाकर नाप लेना चाहिए। यदि बुखार 100 तक है, तो चिन्ता की कोई बात नहीं है। ऐसा बुखार स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होता है, क्योंकि वह शरीर के विकारों को भस्म कर देता है। इसलिए उसे अपने आप उतरने देना चाहिए। इस बीच रोगी को आगे बताये गये अनुसार खान-पान करना चाहिए और आराम करना चाहिए। 


2. यदि बुखार 100 से अधिक और 102 तक है, तो वह पाचन प्रणाली की गड़बड़ी और दवाओं के कुप्रभाव के कारण होता है। इसको नियंत्रित करने के लिए पेड़ू पर ठंडे पानी की पट्टियां दो-दो मिनट बाद बदलते हुए तब तक रखनी चाहिए जब तक कि बुखार नीचे न आ जाये। ऐसा दिन में दो-तीन बार करना पड़ सकता है।


3. यदि बुखार 102 या उससे भी अधिक है, तो वह वायरल प्रकार का होता है। ऐसे बुखार में पेड़ू के साथ-साथ माथे पर भी ठंडे पानी की पट्टियां रखनी चाहिए, क्योंकि मस्तिष्क को गर्मी से बचाने की अधिक आवश्यकता होती है। ऐसी पट्टियां तब तक रखनी चाहिए जब तक बुखार 102 से नीचे न आ जाये।


4. बुखार में रोगी को प्रायः भूख नहीं लगती। इसलिए उसका भोजन तुरंत बंद कर देना चाहिए। इसके बजाय उबला हुआ पानी ठंडा करके हर घंटे पर एक गिलास पीते रहना चाहिए और समय-समय पर मूत्र विसर्जन के लिए भी अवश्य जाना चाहिए।


5. यदि रोगी को भूख लग रही है, तो प्रारम्भ में केवल फलों का ताजा रस या सब्जियों का सूप या दाल का पानी देना चाहिए। चाय, दूध तथा उससे बने पदार्थों का सेवन बुखार में करना उचित नही हैं।


6. यदि रोगी को भूख अधिक लग रही है, तो उसे ताजे प्राकृतिक फल या उबली सब्जी या दलिया दिया जा सकता है। बुखार पूरी तरह उतर जाने और भूख वापस आने पर ही हल्का साधारण भोजन देना चाहिए।


7. बुखार में प्रायः पूरे शरीर में दर्द होता है, जो स्वाभाविक है। इसलिए केवल आराम करना चाहिए और किसी भी हालत में कोई दर्दनाशक दवा या बुखार उतारने की दवा नहीं देनी चाहिए।


इस प्रकार उपचार करने पर किसी भी तरह का बुखार हो, अधिक से अधिक एक सप्ताह में अवश्य ठीक हो जाता है। अतः धैर्यपूर्वक उपचार करते रहना चाहिए और रोगी को प्रसन्न रखना चाहिए।


*-- डाॅ विजय कुमार सिंघल*

प्राकृतिक चिकित्सक एवं योगाचार्य

मो. 9919997596

वैशाख शु 4, सं 2078 वि (14 मई, 2021)

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